Category: व्यवहार और परमार्थ

व्यवहार और परमार्थ

व्यवहार और परमार्थ वेदांत के अद्वैत अर्थात् एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति को समझने के लिए व्यावहारिक सत्ता प्रातिभासिक सत्ता तथा पारमार्थिक सत्ता का ज्ञान होना परमावश्यक है। शास्त्र जब जगत् अथवा संसार को मिथ्या कहते हैं, तब परमार्थ सत्ता की दृष्टि से कहते हैं ना कि व्यावहारिक सत्ता की दृष्टि से।व्यावहारिक सत्ता का अर्थ है- […]