Author: Anmol gupta

I am Anmol gupta, i warmly welcome you to APNE KO JANO, and hope you liked this article, My mission is to inspire millions of people, i can show you the right path to go ahead.

सत्संग से लाभ

सत्संग से लाभ 1 ईश्वर, जीव, जगत् तथा परमार्थ सत्ता के विषय में सही सही जानकारी हो जाती है । 2 ‘अविद्या’ नष्ट हो जाने के कारण ‘माया-मोह’ नष्ट हो जाते हैं जिससे देश, काल, वस्तु के प्रति सत्यत्व बुद्धि समाप्त हो जाती है।3 रामचरित मानस में बताये गये मानसिक रोगों से ‘मुक्ति’ मिल जाती […]

अपनी-खोज | APNI KHOJ

अपनी-खोज प्रश्न:- आँख से कौन देखता है, कान से कौन सुनता है, स्वाद को कौन जानता है तथा स्वाद को कौन ग्रहण करता है ?आपका उत्तर होगा:- “हम” |प्रश्न:- आंख की मन्दता, पटुता, कान की मन्दता, पटुता आदि का कौन जानता है ?आप कहेंगे:- “हम” | प्रश्न – मन की चचलता, शान्ति, अशान्तिा, स्थिरता तथा […]

विवेक

विवेक भागवत पुराण के अनुसार विवेक माने अपने सत् स्वरूप का ज्ञान। उपर्युक्त विवेक की विवेचना इस प्रकार है—1- देह से मैं प्रथक हूं, इसेे विवेक कहते हैं। 2- शरीर मुझे मिला है, मैं शरीर नहीं हूं, इसे विवेक कहते हैं। 3- शरीर अनित्य, विकारी तथा विनाशी है, मैं नित्य, अविकारी तथा अविनाशी हूं, इसे […]

कल्याण का मार्ग

कल्याण का मार्ग शास्त्र कहते हैं यदि कोई भी बुद्धिमान व्यक्ति विचार करके देखे, तो ज्ञात होगा, कि उसका जो भी व्यवहार (वर्ताव) सामने वाले के प्रति हो रहा है, वह ईश्वर के साथ ही हो रहा है। क्योंकि गीता,मानस तथा पुराण आदि “जीव” को ईश्वर का अंश बतलाते हैं। भगवान‌‌ श्री कृष्ण ने तो […]

व्यवहार और परमार्थ

व्यवहार और परमार्थ वेदांत के अद्वैत अर्थात् एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति को समझने के लिए व्यावहारिक सत्ता प्रातिभासिक सत्ता तथा पारमार्थिक सत्ता का ज्ञान होना परमावश्यक है। शास्त्र जब जगत् अथवा संसार को मिथ्या कहते हैं, तब परमार्थ सत्ता की दृष्टि से कहते हैं ना कि व्यावहारिक सत्ता की दृष्टि से।व्यावहारिक सत्ता का अर्थ है- […]

भागवत कथा-ज्ञान यज्ञ

भागवत कथा-ज्ञान यज्ञ भगवत तथा ज्ञान यज्ञ भागवत कथा-ज्ञान यज्ञ

जीव की उत्पत्ति बंधन तथा मुक्ति

जीव की उत्पत्ति बंधन तथा मुक्ति जिसप्रकारआकाश के प्रतिबिंब तथा आकाश में भेद नहीं है अर्थात् दो आकाश नहीं है । सूर्य और प्रतिबिंबित सूर्य दो नहीं है, मुख और मुखाभास दो नहीं हैं । सूर्य तथा सूर्य का प्रकाश दो वस्तुयें नहीं है, चीनी तथा मिठास दो चीजें नहीं हैं । उसीप्रकार चेतन आत्मा […]

वेदान्त का उद्घोष

वेदान्त का उद्घोष आत्मतत्व का ज्ञान हो जाने का अर्थ यह नहीं है कि प्रपंच अथवा जगत की प्रतीति नहीं होगी अथवा भूख, प्यास, कष्ट, पीड़ा, सुख-दुःख, जन्म-मृत्यु, विषयों तथा अपने-पराये आदि की प्रतीति नहीं होगी| यह सब बिल्कुल वैसा ही होगा, जैसा पहले होता था । केवल इनके प्रति सत्यत्व बुद्धि  नहीं रहेगी।           […]

काल चक्र |हिंदू-मुसलमान

काल चक्र |हिंदू-मुसलमान काल चक्र में धनवान-कंगाल और कंगाल-धनवान, राजा-भिकारी और भिकारी-राजा हो जाते हैं। समुद्र-पर्वत और पर्वत समुद्र खेत-तालाब और तालाब-खेत लोहा मिट्टी मिट्टी लोहा हो जाती है। मंदिर-मस्जिद और मस्जिद-मंदिर, हिंदू-मुसलमान, मुसलमान-हिंदू , पाकिस्तानी-हिंदुस्तानी और हिंदुस्तानी पाकिस्तानी हो जाते हैं। मनुष्य- देवता, देवता-मनुष्य, पशु-मनुष्य, मनुष्य-पशु, गाय-भैंस और भैंस-गाय बन जाती हैं। देवता-दैत्य, दैत्य-देवता, […]

Guru | गुरु

गुरु – मानव जीवन में गुरु की परम आवश्यकता है । गुरु – मानव जीवन में गुरु की परम आवश्यकता है । भारतीय दर्शन में गुरु उसे माना गया है, जिससे व्यक्ति शिक्षा अर्थात् किसी भी विषय का ज्ञान प्राप्त करता है । इसीलिए माता – पिता को प्रथम गुरु का स्थान दिया गया है […]